
हरदी में लगा जनसेवा का बड़ा शिविर, महिलाओं के समूहों को मिली 30 लाख की आर्थिक ताकत
सारंगढ़ बिलाईगढ़, 18 मई 2026। जिले में सुशासन तिहार के दौरान एक अलग तस्वीर देखने को मिली, जब कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू समेत जिला प्रशासन के अधिकारी निजी वाहनों के बजाय सामूहिक रूप से बस में सवार होकर हरदी पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ईंधन बचत अभियान और ऊर्जा संरक्षण के संदेश को जमीन पर उतारते हुए प्रशासन ने यह पहल की।
हरदी शिविर में योजनाओं की बरसी सौगात, महिलाओं को मिला बड़ा आर्थिक सहयोग
सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत हरदी स्थित हाईस्कूल परिसर में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के साथ कई हितग्राही योजनाओं का लाभ भी वितरित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने की। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य लता लक्ष्मे, विनोद भारद्वाज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम में महिला स्वसहायता समूहों को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ी पहल करते हुए 6 समूहों को 6-6 लाख रुपये के प्रतीकात्मक चेक सौंपे गए। इन समूहों में उज्ज्वला रेड़ा, गुरुवारी हरदी, खुशी चुरेला, मां शारदा अमेठी और स्वागत चुरेला जैसे समूह शामिल रहे।
ग्रामीणों को एक ही मंच पर मिला योजनाओं का लाभ
शिविर में पात्र हितग्राहियों को राशन कार्ड, पीएम उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, कृषि आदान सामग्री और प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना के पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्रासन संस्कार भी कराया गया।
जनसमस्याओं के समाधान के लिए उमड़ी भीड़
क्लस्टर आधारित इस शिविर में आसपास के गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने पंचायतवार अपनी समस्याएं और आवेदन दर्ज कराए। स्वास्थ्य, आयुष और पशुधन विभाग द्वारा मौके पर उपचार और परामर्श की व्यवस्था भी की गई थी।
अधिकारियों ने गिनाईं योजनाएं, लखपति दीदियों ने सुनाई सफलता की कहानी
कार्यक्रम की शुरुआत विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं की जानकारी देने के साथ हुई। कृषि, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, विद्युत, उद्यानिकी, श्रम, रेशम पालन और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से अवगत कराया।
इसी दौरान बिहान समूह से जुड़ी लखपति दीदियों ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए बताया कि किस तरह छोटे कामों से शुरुआत कर वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनीं।







