शिक्षा विभाग में ‘अटैचमेंट विवाद’ से बवाल, प्राचार्य की पोस्टिंग के बाद भी समग्र शिक्षा में वापसी पर उठे सवाल

 रायपुर : स्कूल शिक्षा विभाग और लोक शिक्षण संचालनालय के लगातार जारी हो रहे निर्देशों के बीच एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग में अटैचमेंट और पोस्टिंग को लेकर चल रही व्यवस्था अब बहस का बड़ा मुद्दा बन गई है।

प्राचार्य पद पर नियुक्ति के बाद भी 4 घंटे में वापसी का मामला

मामले में व्याख्याता अजय देशपांडे का नाम चर्चा में है। जानकारी के अनुसार, उनका नाम प्राचार्य पद की सूची में शामिल होने के बाद उनकी पोस्टिंग भी एक स्कूल में की गई थी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि कार्यभार ग्रहण करने के कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें कार्यमुक्त कर फिर से समग्र शिक्षा कार्यालय में अटैच कर दिया गया।बताया जा रहा है कि वे पिछले कई महीनों से समग्र शिक्षा कार्यालय में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनका मूल पद स्कूल में प्राचार्य का है।

अटैचमेंट नीति और आदेशों के बीच विरोधाभास

सरकारी आदेशों के अनुसार वर्ष 2025 की स्थानांतरण नीति में स्पष्ट किया गया है कि सभी प्रकार के अटैचमेंट समाप्त किए जाएंगे और भविष्य में इन्हें अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद इस मामले में अटैचमेंट जारी रहने पर सवाल उठ रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी धमतरी की ओर से समग्र शिक्षा से प्राचार्य की वापसी के लिए पत्र भी भेजा गया, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

विभागीय पत्राचार के बाद भी स्थिति जस की तस

बताया जा रहा है कि समग्र शिक्षा के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि संबंधित प्राचार्य को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।इस पूरे मामले ने विभागीय कार्यप्रणाली और आदेशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोहरी व्यवस्था और शिक्षकों में असंतोष

वहीं दूसरी ओर, सामान्य शिक्षकों के लिए सख्त आदेश और अनुशासनात्मक कार्रवाई लगातार जारी हैं। छोटी चूक पर कार्रवाई के बीच इस तरह के अटैचमेंट मामलों को लेकर शिक्षकों में असंतोष भी देखा जा रहा है।शिक्षक समुदाय का कहना है कि जहां एक ओर नियमित आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ मामलों में ढिलाई व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है।

बड़ा सवाल: आदेशों का पालन कब होगा पूरी तरह लागू

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शासन स्तर से अटैचमेंट समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश हैं, तो ऐसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है। साथ ही यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि स्कूलों में पदस्थापना के बावजूद अधिकारी लंबे समय तक अन्य कार्यालयों में क्यों कार्यरत हैं।यह पूरा मामला शिक्षा विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था और नीति क्रियान्वयन पर एक बार फिर बहस छेड़ रहा है।

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