
रायपुर : पुरुषोत्तम मास के अवसर पर कैपिटल होम फेस-1 में महिलाओं द्वारा भक्ति और आध्यात्मिकता से ओतप्रोत भजन संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने पीले वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना की। भजन-कीर्तन के साथ भगवान सत्यनारायण की कथा का भी आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने सहभागिता निभाई।
सनातन संस्कृति से जोड़ने पर हुई विशेष चर्चा
कथा वाचन के बाद सुषमा गर्ग और उनकी मंडली ने सनातन धर्म की महत्ता पर विचार साझा किए। इस दौरान बच्चों और युवाओं को धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और व्यस्त दिनचर्या के कारण नई पीढ़ी अपने धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं से दूर होती जा रही है, जिससे धर्म संबंधी ज्ञान में कमी देखने को मिल रही है।उन्होंने निर्णय लिया कि समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाएंगे, जिनके माध्यम से बच्चों और युवाओं को सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों की जानकारी दी जा सके, ताकि वे अपने धर्म और कर्तव्यों को बेहतर ढंग से समझ सकें।
पुरुषोत्तम मास को बताया भक्ति का श्रेष्ठ समय
सुषमा गर्ग ने कथा के दौरान बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु की उपासना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस माह में की गई श्रद्धापूर्ण भक्ति का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं और उनकी सच्चे मन से की गई आराधना भक्तों की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है।
भक्ति और सेवा का अनूठा संगम
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने पीले चावल का तिलक लगाकर पूजा-अर्चना की और सामूहिक रूप से महाभोग का आयोजन किया। विशेष बात यह रही कि भगवान को अर्पित किया गया प्रसाद सभी महिलाओं ने अपने घरों में स्वयं तैयार किया था। पूजा-अर्चना के बाद प्रसाद का वितरण किया गया।
भजनों से गूंज उठा पूरा परिसर
ढोलक, हारमोनियम, मंजीरा और अन्य वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के बीच भजन संध्या ने पूरे परिसर को भक्तिमय वातावरण में बदल दिया। महिलाओं ने स्वयं वाद्य यंत्र बजाकर भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे आयोजन और भी आकर्षक बन गया।
धार्मिक आयोजनों को मिलेगा नया विस्तार
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने यह भी निर्णय लिया कि भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों को नियमित रूप से जारी रखा जाएगा। इसके लिए चढ़ावे में प्राप्त राशि से नए वाद्य यंत्र खरीदे जाएंगे, ताकि भविष्य में और अधिक भव्य तरीके से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें।आयोजकों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में संस्कार, एकता और धार्मिक जागरूकता को भी मजबूत बनाते हैं।







