
भाटागांव। उर्मिला फाउंडेशन द्वारा शिक्षा के महत्व को लेकर आयोजित जागरूकता कार्यशाला में बच्चों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य पर विशेष चर्चा की गई। कार्यक्रम में डॉ. विनोद सिंह ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का मूल अधिकार है और किसी भी बच्चे को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि बच्चे शिक्षित होंगे तो आने वाले समय में एक बेहतर समाज, विकसित शहर और मजबूत भारत का निर्माण संभव होगा। शिक्षा केवल व्यक्ति का जीवन नहीं बदलती, बल्कि पूरे समाज की दिशा और दशा तय करती है।
हर बच्चे तक पहुंचे शिक्षा की रोशनी
डॉ. विनोद सिंह ने उपस्थित लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि वे अपने आसपास यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा विद्यालय जाने से वंचित न रहे। यदि किसी कारणवश कोई बच्चा स्कूल नहीं जा रहा है, तो सबसे पहले उसके अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार भी गंभीरता से प्रयास कर रही है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में शाला प्रवेश उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, ताकि शिक्षा की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की जा सके।
सरकारी विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता में लगातार सुधार
कार्यक्रम में नम्रता सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में निजी विद्यालयों में प्रवेश को लेकर अभिभावकों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है। लोगों को इस सोच से बाहर निकलकर सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता पर भी विश्वास करना चाहिए।उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बेहतर करने के लिए शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
शिक्षा से ही बदलेगा भविष्य
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा बच्चों के सपनों को साकार करने का सबसे सशक्त माध्यम है। शिक्षित पीढ़ी ही समाज को नई दिशा देने के साथ देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए हर परिवार और समाज का दायित्व है कि बच्चों को विद्यालय से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत करे।







