भोपाल में दिखा नई सोच का संकेत…ई-रिक्शा से शपथ ग्रहण में पहुंचे नेता, संदेश बना चर्चा का विषय

 भोपाल : राजधानी भोपाल में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब पारंपरिक वीआईपी काफिलों की जगह सादगी और जिम्मेदारी का संदेश सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल कम उपयोग करने की अपील का असर अब राजनीतिक गलियारों में नजर आने लगा है।

जब पद की गरिमा के साथ जुड़ा पर्यावरण का संदेश

मध्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह अपने शपथ ग्रहण समारोह में ई-रिक्शा से पहुंचे। उनका यह कदम सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि एक संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे समर्थकों के साथ ई-रिक्शा में सवार दिखाई दे रहे हैं।इस मौके पर उन्होंने साफ कहा कि प्रधानमंत्री का यह आह्वान देशहित में है और हर नागरिक को इसे अपनाना चाहिए।

बीजेपी मुख्यालय में आज कई पदाधिकारी संभालेंगे जिम्मेदारी

आज पार्टी मुख्यालय में कई अहम नियुक्तियां भी हो रही हैं। पंकज जोशी और राकेश सिंह जादौन भी अपने पद की जिम्मेदारी संभालेंगे। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी रहेगी। इस दौरान सभी नेता कार्यालय परिसर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे।

पीएम की दोहरी अपील: ईंधन बचाओ, वैश्विक संकट को समझो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में 24 घंटे के भीतर दो बार देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम किया जाना चाहिए। उन्होंने खाड़ी देशों में चल रहे तनाव को पिछले एक दशक की बड़ी चुनौती बताया और ऊर्जा बचत को राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत किया।

कैबिनेट मीटिंग में फीकी रही अपील की गूंज

हालांकि, सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह असर सीमित नजर आया। अधिकतर मंत्री अपने निजी वाहनों से ही बैठक में पहुंचे। बावजूद इसके, मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए सभी को ईंधन बचाने की सलाह दी।

700 गाड़ियों का काफिला बना था विवाद की वजह

इससे पहले पाठ्यपुस्तक निगम के नए अध्यक्ष सौभाग्य सिंह ठाकुर का भोपाल आगमन भी चर्चा में रहा था। वे उज्जैन से करीब 700 गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे थे, जिससे शहर में लंबा जाम लग गया और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

बदलती तस्वीर या अपवाद?

सत्येंद्र भूषण सिंह का ई-रिक्शा से शपथ ग्रहण में पहुंचना एक सकारात्मक संकेत जरूर माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल व्यापक स्तर पर बदलाव लाती है या फिर कुछ सीमित उदाहरणों तक ही सिमट कर रह जाती है।

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