
रायपुर : ’छत पर सोलर प्लांट, घर में खुशियों की रोशनी
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच से बदली त्रिलोक मिश्रा के घर की तस्वीर
पीएम सूर्यघर योजना का दिख रहा जमीनी असर
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग
रायपुर, 25 सितंबर 2026
कभी हर महीने आने वाला 3 से 3.5 हजार रुपये का बिजली बिल घरेलू बजट पर बोझ बनता था। बिजली की खपत बढ़ने पर बिल बढ़ने की चिंता रहती थी। आज गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के गुरुकुल परिसर पेंड्रारोड निवासी श्री त्रिलोक मिश्रा के घर की छत ही बिजली उत्पादन का माध्यम बन गई है। 3 किलोवाट का सोलर प्लांट लगने के बाद उनके घर में केवल बिजली की बचत नहीं हुई, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक नई शुरुआत हुई है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ श्री त्रिलोक मिश्रा को भी मिला है। योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली, जो सीधे उनके बैंक खाते में जमा हुई। श्री मिश्रा इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और उपभोक्ता हितैषी बताते हैं।
छत बनी बिजली का स्रोत, घटा घरेलू खर्च
सोलर प्लांट लगने से पहले श्री त्रिलोक मिश्रा के घर का मासिक बिजली बिल लगभग 3 हजार से 3 हजार 500 रुपये तक आता था। हर महीने बिजली बिल के लिए अलग से राशि की व्यवस्था करनी पड़ती थी। सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होने के बाद उनके घरेलू बिजली खर्च की तस्वीर बदल गई।
श्री मिश्रा बताते हैं कि अब उनके घर की जरूरत की बिजली का एक बड़ा हिस्सा उनकी अपनी छत से ही तैयार हो रहा है। सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन शुरू होने के बाद उन्हें माइनस बिल भी प्राप्त हुए। अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दिए जाने पर उसकी राशि बिजली बिल में समायोजित होती रही। इससे उन्हें बिजली खर्च में राहत के साथ-साथ अपनी छत पर उत्पादित ऊर्जा का बेहतर उपयोग करने का अवसर मिला।
श्री मिश्रा कहते हैं कि अब हमें बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। हमारी जरूरत की बिजली हमारी अपनी छत से बन रही है।
यह अनुभव उनके लिए केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। उनके घर की छत अब स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन गई है। इससे उन्हें यह भरोसा भी मिला है कि घर-परिवार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सौर ऊर्जा एक उपयोगी और स्थायी विकल्प बन सकती है।
78 हजार रुपये की सब्सिडी ने आसान किया सौर ऊर्जा का सफर
श्री त्रिलोक मिश्रा के लिए सोलर प्लांट लगाने का निर्णय इसलिए भी आसान हुआ क्योंकि योजना के तहत उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में पहुंचने से प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बना रहा।
श्री मिश्रा बताते हैं कि सोलर प्लांट लगाने की प्रक्रिया उनके लिए सहज रही। उनके अनुसार, योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता ने सौर ऊर्जा को अपनाने के निर्णय को और आसान बनाया।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता का विजन
पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य घरों की छतों पर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देकर परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सौर ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से अब आम परिवार भी अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन के माध्यम के रूप में देख रहे हैं।
श्री त्रिलोक मिश्रा का अनुभव इसी बदलाव की एक स्थानीय तस्वीर है। जहां पहले उनकी छत केवल घर का हिस्सा थी, वहीं अब वही छत बिजली पैदा कर रही है। इससे एक ओर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर परिवार के बिजली खर्च में भी राहत महसूस हो रही है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। पीएम सूर्यघर योजना के माध्यम से जिले के परिवारों को अपने घरों की छत पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने का अवसर मिल रहा है।
श्री त्रिलोक मिश्रा की कहानी बताती है कि जब किसी जनकल्याणकारी योजना का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव सीधे परिवार के जीवन में दिखाई देता है। सौर ऊर्जा के माध्यम से उन्हें बिजली खर्च में राहत मिली है और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है।
पर्यावरण के साथ घरेलू बजट के लिए भी राहत
सौर ऊर्जा का लाभ केवल बिजली बिल में कमी तक सीमित नहीं है। यह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा का माध्यम भी है। श्री मिश्रा के घर में सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने से उन्हें आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संतोष भी मिल रहा है।
वे मानते हैं कि यदि अधिक से अधिक परिवार अपनी छतों पर सोलर प्लांट लगाएं, तो इससे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर पर्यावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।







