
गुजरात में UCC बिल को राष्ट्रपति मुर्मु की मंजूरी, बहुविवाह पर रोक और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को अपनी औपचारिक स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही राज्य में इस कानून को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है।उत्तराखंड के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला कानून पारित करने वाला गुजरात देश का दूसरा राज्य बन गया है। हालांकि, इस विधेयक के प्रावधान अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के सदस्यों पर लागू नहीं होंगे।
महिला अधिकारों को मिलेगी पूरी सुरक्षाविधानसभा में इस विधेयक को प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा था कि यूसीसी उन प्राथमिक सुधारों में शामिल है, जिन्हें लागू करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
नए कानून के तहत सभी नागरिकों के लिए विवाह और तलाक का औपचारिक पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन न करने पर ₹10,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, सभी प्रकार के लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण भी जरूरी होगा और संबंध समाप्त होने की स्थिति में इसकी सूचना भी प्रशासन को देनी होगी। इस कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा होने वाले बच्चों को कानूनी रूप से वैध संतान माना जाएगा, और यदि महिला को उसका पार्टनर छोड़ देता है, तो उसे गुजारा भत्ता पाने का पूरा कानूनी अधिकार होगा। इस कानून के माध्यम से एक से अधिक विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति दबाव या जोर-जबरदस्ती के जरिए शादी कराता है, तो उसके लिए 7 साल तक के कारावास का कड़ा प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, सक्षम अदालत के आदेश के बिना किसी भी अन्य तरीके से लिए गए तलाक को गैर-कानूनी मानते हुए 3 साल तक की जेल की सजा तय की गई है। कानून में तलाकशुदा जोड़ों को बिना किसी अनुचित शर्त के दोबारा शादी करने का अधिकार दिया गया है और हलाला जैसी प्रथाओं पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई है।





