
रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का भव्य आगाज 1 नवंबर से, तीन दिनों तक लोककला, संस्कृति और संगीत के रंगों से सराबोर होगा नवा रायपुर
केंद्रीय मंत्री श्री मनसुख मांडविया करेंगे राज्योत्सव का शुभारंभ, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय करेंगे अध्यक्षता
रायपुर, 31 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गौरवशाली लोकपरंपराओं, जनजातीय जीवनशैली और कला-संगीत की अनुपम छटा के साथ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्योत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ कल 1 नवंबर से होने जा रहा है। नवा रायपुर अटल नगर स्थित राज्योत्सव मैदान में 1 से 3 नवंबर तक आयोजित होने वाला यह महोत्सव प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता, लोककलाओं और परंपराओं का जीवंत संगम बनेगा। तीन दिनों तक प्रदेश के विभिन्न अंचलों के कलाकार अपनी लोककलाओं का प्रदर्शन करेंगे, वहीं देश के प्रसिद्ध पार्श्व गायक और गायिकाएं अपनी प्रस्तुतियों से उत्सव की रौनक बढ़ाएंगे।
राज्योत्सव के उद्घाटन समारोह में 1 नवंबर को शाम 6 बजे केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री मनसुख मांडविया मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और श्री विजय शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। समारोह में प्रदेश सरकार के मंत्रीगण, सांसद, विधायक तथा अन्य जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
राज्योत्सव के दूसरे दिन 2 नवंबर को राज्यपाल श्री रमेन डेका मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल करेंगे। इस अवसर पर विधायक श्री राजेश मूणत, श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू, श्री सुनील सोनी, श्री अनुज शर्मा और श्री इंद्र कुमार साहू विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
राज्योत्सव का समापन 3 नवंबर को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। इस अवसर पर राज्य अलंकरण समारोह का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।
*पहले दिन पलक मुच्छल के सुरों से सजेगी राज्योत्सव की शाम*
राज्योत्सव के पहले दिन 1 नवंबर को मुख्य मंच पर शाम 5 बजे से सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला प्रारंभ होगा। शाम 5 से 6 बजे तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार प्रादेशिक एवं राज्यस्तरीय लोकसंगीत की प्रस्तुतियां देंगे। शाम 6 बजे से रायपुर के कलाकार श्री अनुराग शर्मा अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगे। शाम 6.30 से 8 बजे तक उद्घाटन समारोह आयोजित होगा। इसके बाद रात 8 बजे से बॉलीवुड की प्रसिद्ध पार्श्व गायिका सुश्री पलक मुच्छल अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।
*दूसरे दिन ‘मैं अयोध्या हूं‘ नाट्य मंचन और स्वास्ति मेहुल की संगीतमय प्रस्तुति*
राज्योत्सव के दूसरे दिन 2 नवंबर को कला और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिलेंगे। शाम 6 से 7 बजे तक ‘मैं अयोध्या हूं‘ नाट्य प्रस्तुति का मंचन किया जाएगा। यह प्रस्तुति भारतीय सांस्कृतिक चेतना और अयोध्या की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को मंच पर अभिव्यक्त करेगी। शाम 7 से 8 बजे तक रायपुर के कलाकार श्री सुनील सोनी अपनी प्रस्तुति देंगे। इसके बाद रात 8 बजे से बॉलीवुड पार्श्व गायिका सुश्री स्वास्ति मेहुल के गीतों से राज्योत्सव का मंच गुंजायमान होगा।
*तीसरे दिन पद्मश्री उषा बारले की लोक प्रस्तुति, अभिजीत भट्टाचार्य के गीतों से होगा समापन*
राज्योत्सव के अंतिम दिन 3 नवंबर को शाम 6 से 6.30 बजे तक दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के कलाकार लोकसंगीत की प्रस्तुति देंगे। शाम 6.30 से 7 बजे तक छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंथी कलाकार पद्मश्री सुश्री उषा बारले की प्रस्तुति विशेष आकर्षण होगी। शाम 7 से रात 9 बजे तक राज्य अलंकरण समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बाद रात 9 बजे से बॉलीवुड के प्रसिद्ध पार्श्व गायक श्री अभिजीत भट्टाचार्य अपने लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देंगे।
*शिल्पग्राम में तीन दिनों तक दिखेगी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की अनुपम छटा*
राज्योत्सव के मुख्य मंच के साथ ही शिल्पग्राम में भी स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। शिल्पग्राम मंच पर प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रारंभ होंगे। तीन दिनों में कुल 30 स्थानीय प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला, लोकसंगीत, नृत्य, नाट्य और विभिन्न सांस्कृतिक विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इन प्रस्तुतियों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आने वाले कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। शिल्पग्राम में पंडवानी, पंथी, सुआ नृत्य, कथक, ओडिसी, लोकमंच, लोकगीत, भजन, सूफी संगीत, गजल, शास्त्रीय नृत्य और आदिवासी लोकसंगीत जैसी विविध विधाओं को स्थान दिया गया है। इससे स्थानीय कलाकारों को अपनी कला के प्रदर्शन का व्यापक मंच मिलेगा और दर्शकों को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता से परिचित होने का अवसर प्राप्त होगा।








