
सेवा की कहानी : चिरायु योजना: निःशुल्क उपचार से 12 वर्षीय तरुणा को मिला स्वस्थ जीवन का उपहार
रायपुर 29 सितम्बर 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा सेवा, समर्पण और जनकल्याण के संकल्प की प्रेरणादायी यात्रा रही है। इसी सेवा भावना को जन-जन तक पहुंचाने और जरूरतमंदों को समय पर शासकीय योजनाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ दिलाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम महासमुंद जिले में भी देखने को मिल रहा है। विकासखंड बागबाहरा की शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भानपुर की कक्षा 7वीं में अध्ययनरत 12 वर्षीय कुमारी तरुणा यादव की कहानी इसी जनसेवा की एक मिसाल है।
बचपन से जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित तरुणा को खेलने-कूदने, दौड़ने और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होती थी। परिवार इसे सामान्य कमजोरी समझता रहा। विद्यालय में बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पहुंचे चिरायु दल ने तरुणा की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी को गंभीरता से लिया। जांच एवं चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से उसके जन्मजात हृदय रोग की पहचान की गई। समय पर हुई इस पहचान ने उपचार की राह आसान कर दी। बीमारी की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा तरुणा के उपचार की प्रक्रिया तत्काल आगे बढ़ाई गई। उसे रायपुर स्थित एमएमआई नारायणा हृदयालय अस्पताल में उपचार के लिए भेजा गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा आवश्यक जांच के बाद उसका निःशुल्क हृदय ऑपरेशन किया गया। उपचार के दौरान परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा और शासकीय स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई।
ऑपरेशन के बाद तरुणा के स्वास्थ्य में काफी सुधार हुआ है। अब वह पहले की तुलना में स्वस्थ है और सामान्य गतिविधियों में भाग ले पा रही है। खेलना-कूदना, चलना-फिरना और दैनिक गतिविधियां अब उसके लिए पहले से कहीं आसान हो गई हैं। तरुणा के चेहरे पर लौटी मुस्कान और उसके स्वस्थ भविष्य की उम्मीद परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी है। तरुणा के परिजनों ने समय पर बीमारी की पहचान करने, उपचार की प्रक्रिया में सहयोग देने और निःशुल्क हृदय शल्य चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए चिरायु दल एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
चिरायु दल के आयुष चिकत्सा अधिकारी डॉ. विकास कुमार चौहान, डॉ. सुजाता शुक्ला, फार्मासिस्ट सुरेखा साहू एवं आरएचओ विशाखा साहू ने समर्पण एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए तरुणा की पहचान से लेकर उपचार तक की प्रक्रिया में योगदान दिया।







