सोनिया गांधी की बढ़ीं मुश्किलें! मतदाता सूची और नागरिकता विवाद मामले में सुनवाई फिर टली

दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टाल दी गई है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी। यह पूरा मामला भारतीय नागरिकता मिलने से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। फिलहाल अदालत में मामले की प्रक्रिया जारी है और अगली तारीख पर आगे की सुनवाई की जाएगी।

मतदाता सूची में नाम दर्ज होने को लेकर उठे सवाल

याचिका में दावा किया गया है कि सोनिया गांधी को भारतीय नागरिकता 30 अप्रैल 1983 को प्राप्त हुई थी, जबकि उनका नाम वर्ष 1980 की नई दिल्ली मतदाता सूची में पहले से दर्ज बताया गया है। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने अदालत में सवाल उठाया है कि आखिर नागरिकता मिलने से पहले उनका नाम किस आधार पर मतदाता सूची में शामिल किया गया।

अदालत ने दोनों पक्षों से मांगी लिखित दलीलें

पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित दलीलें प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसी दौरान शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने भारत निर्वाचन आयोग से प्राप्त कुछ दस्तावेज अदालत के अभिलेख में शामिल करने की अनुमति मांगी थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

मुकदमा नहीं, पहले पुलिस जांच की मांग

सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत से कहा कि उनकी फिलहाल मांग मुकदमा शुरू कराने की नहीं है, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष पुलिस जांच कराई जाए। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि इस पूरे प्रकरण में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिनकी गहराई से जांच जरूरी है। इसलिए मामले की विस्तृत जांच कराई जानी चाहिए।

फर्जी दस्तावेज इस्तेमाल होने की आशंका भी जताई गई

याचिकाकर्ता ने अदालत में यह भी सवाल उठाया है कि क्या उस समय मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए किसी फर्जी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया था। इसी आधार पर मामले में विस्तृत पुलिस जांच कराने की मांग की गई है ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

1982 में नाम हटाने का दावा बना नया विवाद

पुनरीक्षण याचिका में यह अतिरिक्त दावा भी किया गया है कि वर्ष 1982 में सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि नाम हटाने के पीछे क्या कारण थे और यह प्रक्रिया किन नियमों या दस्तावेजों के आधार पर पूरी की गई थी।

अब अगली सुनवाई पर टिकी सबकी नजरें

फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है। अब सभी की नजरें 4 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां अदालत इस मामले में आगे की प्रक्रिया और जांच को लेकर महत्वपूर्ण फैसला ले सकती है।

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