
सेवा की कहानी : प्राकृतिक खेती अपनाकर तुलसा ने बढ़ाई आमदनी
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन से मिली प्रेरणा, कम लागत में बेहतर मुनाफा अर्जित कर बनीं आत्मनिर्भर
रायपुर, 17 अक्टूबर 2026
कोण्डागांव जिले के माकड़ी विकासखंड के ग्राम छिनारी की महिला कृषक श्रीमती तुलसा महावीर ने प्राकृतिक खेती अपनाकर कृषि के क्षेत्र में सफलता की नई मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत कृषि विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण से उन्होंने रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करते हुए प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाया। इससे न केवल खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई, बल्कि उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ।
श्रीमती तुलसा पहले अपनी खेती में रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का उपयोग करती थीं। उनकी खेती की लागत लगभग 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती थी, लेकिन मेहनत के अनुरूप लाभ नहीं मिल पा रहा था। साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर भी उन्हें चिंता होने लगी थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के बारे में जानकारी मिली। कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कृषि अमले के मार्गदर्शन और प्रशिक्षण से उन्होंने प्राकृतिक खेती की तकनीकों को समझा और अपने खेत में धीरे-धीरे इन्हें अपनाना शुरू किया।
प्राकृतिक तकनीकों से बदली खेती की तस्वीर
श्रीमती तुलसा ने अपने खेत में बीज उपचार के लिए बीजामृत, फसल प्रबंधन के लिए जीवामृत एवं घनजीवामृत, आच्छादन तथा प्राकृतिक कीट प्रबंधन जैसी तकनीकों का उपयोग किया। इन तकनीकों को अपनाने के लिए उन्होंने खेत और गांव में उपलब्ध स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल किया। इससे खेती में बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम करने और उत्पादन लागत घटाने में सहायता मिली। प्राकृतिक खेती अपनाने का सकारात्मक परिणाम उनकी खेती में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। पहले जहां खेती की लागत लगभग 40 हजार रुपये थी, वहीं प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद यह घटकर 19,500 रुपये रह गई। इस प्रकार उन्हें 20,500 रुपये यानी लगभग 51.25 प्रतिशत की लागत बचत हुई।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 0.405 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती से 37 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता दर्ज की गई। इससे 01 लाख 14 हजार 700 रुपये की सकल आय तथा 95,200 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। कम लागत में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने से श्रीमती तुलसा महावीर का प्राकृतिक खेती के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ।
अन्य किसानों और महिलाओं को भी कर रहीं प्रेरित
आज श्रीमती तुलसा स्वयं प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ आसपास के किसानों और महिलाओं को भी इसके लिए प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती केवल खेती करने की एक पद्धति नहीं, बल्कि कम लागत, आर्थिक आत्मनिर्भरता और स्वस्थ भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन देने पर राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन और कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।








